टैक्समैन द्वारा प्रकाशित भारतीय न्याय संहिता 2023 [बेयर एक्ट] एक व्यापक, सावधानीपूर्वक अपडेटेड एवं किफ़ायती मूल्य पर उपलब्ध वैधानिक प्रकाशन है, जिसमें भारत के नए मौलिक आपराधिक कानून का संपूर्ण पाठ प्रस्तुत किया गया है। भारतीय दंड संहिता 1860 के स्थान पर अधिनियमित भारतीय न्याय संहिता 2023 भारत की आपराधिक न्याय व्यवस्था में एक ऐतिहासिक सुधार का प्रतिनिधित्व करती है, जिसके अंतर्गत अपराधों, दंडों तथा आपराधिक दायित्व के सिद्धांतों का पुनर्गठन समकालीन संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक आवश्यकताओं एवं आधुनिक अपराध स्वरूपों के अनुरूप किया गया है। यह 2026 संस्करण संसद द्वारा अधिनियमित एवं वर्तमान में प्रवर्तित भारतीय न्याय संहिता, 2023 का शब्दशः तथा प्रामाणिक पाठ प्रस्तुत करता है, जो अद्यतन रूप में उपलब्ध है। यह प्रकाशन वैधानिक शुद्धता, व्यावहारिक उपयोगिता तथा मूल्य-संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से विशेष रूप से तैयार किया गया है। पुस्तक को किफ़ायती एवं व्यापक पाठकवर्ग के लिए सुलभ बनाए रखने हेतु धारा-वार टिप्पणियाँ एवं विस्तृत टीकाएँ जानबूझकर सम्मिलित नहीं की गई हैं। इसके साथ ही, उपयोगिता से कोई समझौता न हो, इस हेतु इसमें तुलनात्मक तालिकाओं का समृद्ध संकलन, संरचित तुलनात्मक अध्ययन उपकरण, दंड मार्गदर्शिकाएँ, तथा विधायी पृष्ठभूमि सामग्री को बनाए रखा गया है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि किफ़ायत के साथ-साथ व्यावहारिक मूल्य भी पूर्ण रूप से सुरक्षित रहे।
यह पुस्तक निम्नलिखित पाठकवर्ग के लिए उपयुक्त है:
- विधि छात्र एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी – भारतीय न्याय संहिता के पाठ्यक्रम के अंतर्गत आपराधिक विधि के अध्ययन हेतु एक किफ़ायती एवं प्राथमिक वैधानिक पाठ के रूप में, IPC–BNS तुलनात्मक साधनों के साथ
- अधिवक्ता एवं आपराधिक कानूनों के प्रैक्टिशनर – नए आपराधिक संहिता के बेयर प्रावधानों के त्वरित संदर्भ हेतु, निरस्त भारतीय दंड संहिता से तुलनात्मक मैपिंग के साथ
- न्यायाधीश एवं न्यायिक अधिकारी – अधिनियमित कानून, तुलनात्मक तालिकाओं तथा दंड संरचना के संक्षिप्त एवं किफ़ायती, बेंच संदर्भ के रूप में
- पुलिस अधिकारी, अभियोजक एवं जाँच एजेंसियाँ – भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत प्रस्तुत अपराधों, दंडों एवं संरचनात्मक परिवर्तनों को समझने हेतु
- सरकारी विभाग, पुलिस अकादमियाँ एवं प्रशिक्षण संस्थान – सामूहिक क्रय, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा IPC-आधारित मैनुअलों से रूपांतरण के उद्देश्य से
- पुस्तकालय एवं सार्वजनिक संस्थान – किफ़ायती मूल्य पर नए आपराधिक कानून ढाँचे तक पहुँच उपलब्ध कराने हेतु
वर्तमान प्रकाशन 2026 संस्करण है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता [अधिनियम सं. 45, 2023] का संशोधित एवं वर्तमानानुसार पाठ सम्मिलित है। इस संस्करण की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- [संपूर्ण बेयर एक्ट पाठ] भारतीय न्याय संहिता 2023 का पूर्ण एवं शब्दशः वैधानिक पाठ, सटीक धारा क्रमांकन तथा प्रामाणिक विधिक भाषा सहित
- [किफ़ायत-केंद्रित संरचना] पष्ठ संख्या नियंत्रित रखने एवं आवरण मूल्य को किफ़ायती बनाए रखने के उद्देश्य से धारा-वार टिप्पणियाँ एवं विस्तृत टीकाएँ जानबूझकर सम्मिलित नहीं की गई हैं
- [BNS 2023 एवं IPC 1860 का तुलनात्मक अध्ययन] समर्पित तुलनात्मक सामग्री, जिससे पाठक यह समझ सकें कि नई संहिता किस प्रकार भारतीय दंड संहिता से मेल खाती है तथा किन बिंदुओं पर उससे भिन्न है
- [IPC–BNS संबद्धता तालिका] भारतीय दंड संहिता की धाराओं को भारतीय न्याय संहिता की समतुल्य धाराओं से जोड़ने वाली तालिका
- [BNS–IPC संबद्धता तालिका] BNS की धाराओं को संबंधित IPC प्रावधानों से जोड़ने वाली रिवर्स मैपिंग तालिका
- [BNS की नई धाराओं की तालिका] भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत नवीन रूप से जोड़ी गई धाराएं
- [निरस्त IPC धाराओं की तालिका] नए आपराधिक संहिता के अंतर्गत हटाई गई अथवा निरस्त की गई IPC धाराओं की सूची
- [दंड मार्गदर्शिका] भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत अपराधों के लिए निर्धारित दंडों का संरचित एवं त्वरित संदर्भ मार्गदर्शन
- [BNS 2023 हेतु धारा कुंजी] प्रावधानों की शीघ्र पहचान एवं सुगम नेविगेशन हेतु
- [तुलनात्मक अध्ययन की वर्णानुक्रमिक कुंजी] विषय-वार वर्णानुक्रमिक कुंजी, जिससे तुलनात्मक सामग्री में त्वरित खोज संभव हो
- [विधायी पृष्ठभूमि सामग्री] उद्देश्य एवं कारण विवरण, धाराओं पर टिप्पणियाँ तथा अन्य विधायी संदर्भ सामग्री
- [उपयोगकर्ता-अनुकूल प्रस्तुति] स्वच्छ एवं स्पष्ट फॉर्मैटिंग, जिससे अध्ययन, उद्धरण, कक्षा अथवा न्यायालयीन उपयोग सुगम हो
पुस्तक की संरचना निम्नानुसार है:
- संदर्भ उपकरण – तुलनात्मक तालिकाएँ, कुंजियाँ एवं दंड मार्गदर्शिकाएँ त्वरित उपयोग हेतु उपयुक्त रूप से स्थानित की गई हैं
- विधि-केंद्रित प्रस्तुति – बेयर एक्ट का पाठ अध्याय-वार एवं धारा-वार, पूर्णतः वैधानिक क्रम का पालन करते हुए प्रस्तुत किया गया है
- समेकित तुलनात्मक सामग्री – तुलनात्मक अध्ययन साधनों को तार्किक रूप से समूहित किया गया है, जिससे वैधानिक प्रवाह को बाधित किए बिना नए कानून की ओर सहज परिवर्तन संभव हो
- संक्षिप्त एवं किफ़ायती प्रारूप – लागत न्यूनतम रखते हुए उपयोगिता को अधिकतम करने के उद्देश्य से विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है



